‘द केरल स्टोरी 2’ का टीजर हटाने की खबर फर्जी:मेकर्स ने जारी किया ऑफिशियल बयान, कहा- किसी भी कोर्ट ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया

‘द केरल स्टोरी 2’ का टीजर हटाने की खबर फर्जी:मेकर्स ने जारी किया ऑफिशियल बयान, कहा- किसी भी कोर्ट ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया

द केरल स्टोरी 2 का ट्रेलर जारी होते ही फिल्म विवादों में घिर गई है। दावा किया जा रहा है कि कोर्ट ने फ़िल्म के टीजर को हटाने का निर्देश दिया है अब इस मामले में मेकर्स की तरफ से बयान जारी किया गया है और इन खबरों को बेबुनियाद बताया है। सनशाइन पिक्चर्स ने कहा, द केरल स्टोरी 2 के टीजर को हटाने की जो खबरें चल रही हैं, वे पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। यह मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। किसी भी अदालत ने फिल्म का टीजर या कोई भी सामग्री हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है। हमने भी कुछ नहीं हटाया है। फिल्म का टीजर और ट्रेलर हमारे सभी आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर अभी भी मौजूद हैं। हम मीडिया और सभी लोगों से निवेदन करते हैं कि बिना पक्की जानकारी के खबरें न फैलाएं। बता दें, फिल्म के सर्टिफिकेशन और केरल राज्य को कथित तौर पर गलत तरीके से दिखाए जाने को लेकर केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल एक शांत और सौहार्दपूर्ण राज्य है, लेकिन फिल्म में उसे गलत ढंग से दिखाया गया है, जिससे उसकी छवि प्रभावित हो सकती है। दोपहर बाद जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई तो अदालत को बताया गया कि फिल्म के मेकर्स टीजर वापस लेने के लिए तैयार हैं। इसके बाद अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। उस दिन यह तय किया जाएगा कि कोर्ट 27 फरवरी रिलीज से पहले फिल्म देखेगी या नहीं। हालांकि, दोपहर की सुनवाई से पहले अदालत ने कहा था कि वह कोई भी आदेश देने से पहले फिल्म देखना चाहती है। साथ ही, अदालत ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से यह भी पूछा कि क्या फिल्म सभी आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन करती है। बता दें, याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में फिल्म के कुछ हिस्सों में बदलाव की मांग की है, जिसमें फिल्म का टाइटल बदलने की मांग भी शामिल है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित किया गया है, जबकि कथित रूप से यह सिनेमैटोग्राफी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का पालन नहीं करती। शिकायत के अनुसार, विवाद फिल्म के टीजर और ट्रेलर से शुरू हुआ है। इनमें अलग-अलदग राज्यों की महिलाओं की कहानियां दिखाई गई हैं, लेकिन फिल्म का टाइटल ‘केरल स्टोरी’ होने के कारण कथित आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय साजिश जैसे मुद्दों को विशेष रूप से केरल से जोड़कर दिखाए गए हैं।

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