टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मुकाबले से पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एरॉन फिंच ने कई अहम मुद्दों पर बात की। शुक्रवार को मीडिया-डे पर जियोस्टार एक्सपर्ट फिंच ने कहा कि अगर अभिषेक शर्मा फिट होकर वापसी करते हैं तो भारत की टीम और भी मजबूत हो जाएगी। फिंच के मुताबिक, अभिषेक गेंद की पहली ही डिलीवरी से अटैक पर हावी होने की क्षमता रखते हैं और दुनिया में बहुत कम खिलाड़ी हैं जो इस अंदाज में लगातार दबाव बना सकें। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि टूर्नामेंट के आगे के स्टेज को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। स्पिन चुनौती से निपटने के लिए भारत सक्षम
दैनिक भास्कर के सवाल पर फिंच ने कहा, पाकिस्तान के खिलाफ भारत स्पिन अटैक से निपटने के लिए काफी समझदारी दिखाएगा। दिल्ली में खेले गए मुकाबले में इरास्मस ने चार विकेट लिए थे, जहां पिच मैच के आगे बढ़ने के साथ थोड़ी धीमी हो गई थी। हालांकि भारतीय बल्लेबाज स्पिन खेलने में माहिर हैं, लेकिन कोलंबो में उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी। कोलंबो की परिस्थितियां भारत से अलग हैं। यहां के मैदान बड़े हैं और बाउंड्री लंबी है, जबकि पिचें आमतौर पर खासकर मिडिल ओवरों में बल्लेबाजी के लिए सपाट रहती हैं। ऐसी परिस्थितियों में बल्लेबाजों को हर गेंदबाज पर हमला करने के बजाय अपने खास मैच-अप को टारगेट करना होगा। बड़ी बाउंड्री के कारण हल्की सी गलती भी कैच में बदल सकती है। इसलिए शॉट सिलेक्शन और धैर्य दोनों महत्वपूर्ण होंगे।
भारत के पास अनुभव की कमी नहीं है। टीम में बाएं और दाएं हाथ के बल्लेबाजों का अच्छा संतुलन है, जो स्पिन के खिलाफ काफी अहम साबित होता है। एक जैसे हाथ के दो बल्लेबाज क्रीज पर होने से विपक्षी टीम स्पिन का फायदा उठा सकती है, लेकिन भारत ने इस पहलू को भी संतुलित रखा है।
एंकर की भूमिका अब भी अहम
पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम के स्ट्राइक रेट पर चल रही बहस पर फिंच ने कहा कि टी-20 में एंकर की भूमिका खत्म नहीं हुई है। धीमी पिचों पर पारी को संभालने, स्ट्राइक रोटेट करने और सेट बल्लेबाज को अधिक गेंदें देने की खासियत बेहद अहम है। उनके मुताबिक, जीत में योगदान सबसे बड़ा पैमाना है, न कि सिर्फ स्ट्राइक रेट। पावरप्ले होगा निर्णायक
फिंच का मानना है कि श्रीलंका की परिस्थितियों में पावरप्ले का महत्व बढ़ जाता है। पहले छह ओवर में मजबूत शुरुआत मिल जाए तो मिडिल ओवर्स के दबाव को कम किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने बताया कि तेज शुरुआत की कोशिश में विकेट गंवाना भी महंगा पड़ सकता है, इसलिए जोखिम और संतुलन के बीच सही चुनाव जरूरी है।
एसोसिएट टीमों की बढ़ती ताकत
टूर्नामेंट में एसोसिएट टीमों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए फिंच ने कहा कि उन्हें टॉप टीमों के खिलाफ अधिक बाइलैटरल सीरीज और ट्राई-सीरीज के मौके मिलने चाहिए। इससे बड़े मंच पर करीबी मुकाबलों में जीत दर्ज करने का अनुभव मिलेगा। _____________ स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… भारत-पाकिस्तान मैच हमेशा एकतरफा नहीं रहते:4 मुकाबलों में आखिरी गेंद पर फैसला; अब तक नहीं बना 200+ का स्कोर टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मुकाबले का मतलब भारत का दबदबा। आखिर जो टीम 8 में से 7 बार जीतेगी उसका पलड़ा भारी कहा ही जाएगा। भारत 7-1 से आगे है। तो फिर इस मैच की इतनी हाइप क्यों होती है? जब एक टीम इतना आगे है तो फिर यह मुकाबला रोमांचक क्यों बन जाता है? इसकी दो वजहें हैं। एक तो यह कि दोनों देशों के संबंध हमेशा खराब रहे हैं। इसलिए दो दुश्मनों के बीच मैच का हाइप अपने आप बन जाता है। दूसरी वजह यह है कि नतीजे भले ज्यादातर भारत के पक्ष में आए हों लेकिन मुकाबले काफी नजदीकी होते रहे हैं। स्टोरी में आगे हम टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हर मैच की संक्षिप्त कहानी जानेंगे। साथ ही यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि इस बार कैसा खेल देखने को मिल सकता है। पूरी खबर पढ़े
