5000 एकड़ का खुलासा! हजारीबाग लैंड स्कैम में बड़ा धमाका — IAS विनय चौबे के कार्यकाल की जांच में ACB का बड़ा दावा |

5000 एकड़ का खुलासा! हजारीबाग लैंड स्कैम में बड़ा धमाका — IAS विनय चौबे के कार्यकाल की जांच में ACB का बड़ा दावा |

Ranchi/Hazaribagh | News Report:
हजारीबाग में हुए लैंड स्कैम (Land Scam) मामले में अब एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह मामला पूर्व डीसी IAS विनय चौबे के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है।
भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) की अब तक की जांच में सामने आया है कि यह घोटाला महज कुछ एकड़ भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि करीब 5000 एकड़ की अवैध भूमि खरीद-बिक्री का मामला हो सकता है।


एसीबी ने कोर्ट में किया बड़ा खुलासा

हजारीबाग एसीबी कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) ने यह जानकारी दी कि जांच के शुरुआती नतीजे बेहद गंभीर हैं।
उनके मुताबिक, कारोबारी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह द्वारा खरीदी गई भूमि इसी बड़े घोटाले का हिस्सा है।

ACB ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन डीसी, अंचल अधिकारी और कुछ स्थानीय ब्रोकरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इन्हीं के माध्यम से अवैध तरीके से वन भूमि की खरीद-बिक्री और म्यूटेशन (mutation) की प्रक्रिया पूरी करवाई गई थी।


एसीबी ने दर्ज किया केस नंबर 11/2025

हजारीबाग एसीबी ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है। जांच के दायरे में अब कई बड़े अफसरों और प्रभावशाली लोगों के नाम आने की संभावना जताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि विवादित भूमि सदर अंचल के थाना नंबर 252 में स्थित है, जिसमें

  • खाता नंबर 95 (प्लॉट 1055, 1060, 848 — कुल रकबा 28 डिसमिल)
  • खाता नंबर 73 (प्लॉट 812 — रकबा 72 डिसमिल) शामिल हैं।

यह भूमि बभनवे मौजा, हल्का नंबर 11 में स्थित है, जहाँ वर्तमान में नेक्सजेन शोरूम संचालित हो रहा है।


जांच का दायरा हुआ और बड़ा

एसीबी ने अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए पांच अलग-अलग प्लॉट में हुई 23 जमाबंदियों की गहन जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, अगर परत-दर-परत इस मामले की पड़ताल की जाए, तो यह घोटाला झारखंड के इतिहास के सबसे बड़े भूमि घोटालों में से एक साबित हो सकता है।


निष्कर्ष

हजारीबाग लैंड स्कैम में ACB की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
5000 एकड़ के इस कथित घोटाले से यह साफ है कि मामला केवल जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक मिलीभगत और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप भी शामिल हैं।

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