झारखंड के खरसावां गोलीकांड पर Ho भाषा में 1.5 करोड़ की बजट से फिल्म बनेगी। मई से शूटिंग शुरू होकर 1 जनवरी 2027 को रिलीज की तैयारी। जानिए पूरी डिटेल।
खरसावां/झारखंड: झारखंड के ऐतिहासिक खरसावां गोलीकांड को अब बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी है। इस घटना पर आधारित एक फिल्म Ho भाषा में बनाई जाएगी, जिसका बजट लगभग 1.5 करोड़ रुपये रखा गया है।
यह फिल्म राहुल गागराई प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनाई जा रही है। फिल्म की शूटिंग मई महीने से शुरू होगी और जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। इसे 1 जनवरी 2027 को खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर रिलीज करने की योजना है।

सच्ची घटना पर आधारित होगी फिल्म
फिल्म की कहानी 1 जनवरी 1948 को हुए खरसावां गोलीकांड की वास्तविक घटनाओं पर आधारित होगी। इसकी पटकथा ओड़िशा के लेखक-निर्देशक लक्ष्मण मुर्मू ने तैयार की है, जो इस प्रोजेक्ट का निर्देशन भी करेंगे।
फिल्म की शूटिंग खरसावां और कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न लोकेशनों पर की जाएगी। टीम ने पहले ही कई स्थानों का दौरा कर ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन किया है।
विधायक निभाएंगे अहम किरदार
खरसावां के विधायक दशरथ गागराई इस फिल्म में ‘ग्राम मुंडा’ की भूमिका में नजर आएंगे। वे पहले भी Ho भाषा की फिल्मों और एलबम में अभिनय कर चुके हैं।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका
फिल्म में 60 से 70 स्थानीय कलाकारों को अभिनय का अवसर दिया जाएगा। इसके साथ ही ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के कलाकार भी इसमें शामिल होंगे। तकनीकी टीम और सेट निर्माण के लिए बाहरी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
ऑडिशन की तारीखें तय
स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के लिए तीन स्थानों पर ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे:
- 15 अप्रैल – चाईबासा (तांबो चौक, वन विभाग गेस्ट हाउस)
- 16 अप्रैल – जमशेदपुर (गोलमुरी, आदिवासी कला भवन)
- 19 अप्रैल – खरसावां (कला संस्कृति भवन)
अनुभवी निर्देशक संभालेंगे कमान
फिल्म के निर्देशक लक्ष्मण मुर्मू इससे पहले कई Ho और क्षेत्रीय फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं, जिनमें ‘जाहेर आयोआ थिड़ी रे सोना सिकड़ी’, ‘फागुन पोनाई’, ‘काडो कुइली’ और ‘प्रेम पासे’ शामिल हैं।
कई भाषाओं में रिलीज की तैयारी
निर्माताओं के अनुसार, फिल्म को Ho भाषा के अलावा हिंदी, ओड़िया और संथाली में भी डब करने की योजना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक यह कहानी पहुंच सके।
फिल्म का उद्देश्य
फिल्म का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके इतिहास और पूर्वजों के संघर्ष से जोड़ना है। इसके जरिए न केवल ऐतिहासिक घटनाओं को सामने लाया जाएगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी एक बड़ा मंच मिलेगा।

