ऑपरेशन सिंदूर’ को ट्रेडमार्क कराने की होड़, छह आवेदकों ने किया दावा, रिलायंस ने लिया कदम पीछे |

ऑपरेशन सिंदूर’ को ट्रेडमार्क कराने की होड़, छह आवेदकों ने किया दावा, रिलायंस ने लिया कदम पीछे |

नई दिल्ली, 8 मई 2025:
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई के नाम “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर अब ट्रेडमार्क अधिकार हासिल करने की दौड़ शुरू हो गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, अब तक छह अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं ने इस शब्द को ट्रेडमार्क कराने के लिए आवेदन किया है। इसमें शिक्षा, मनोरंजन और ब्रांडिंग जैसे उपयोग शामिल हैं।

सेना की कार्रवाई के बाद बढ़ी ब्रांडिंग रुचि
गौरतलब है कि पहलगाम में 26 नागरिकों की जान लेने वाले आतंकी हमले के दो सप्ताह बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी। इसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। यह मिशन मंगलवार-बुधवार की रात को अंजाम दिया गया और जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा के महत्वपूर्ण केंद्रों को निशाना बनाया गया।

ट्रेडमार्क के लिए छह आवेदकों की होड़
सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, “ऑपरेशन सिंदूर” शब्द को लेकर अब तक छह आवेदन दायर किए जा चुके हैं। इनमें कई निजी दावेदार और कॉर्पोरेट नाम शामिल हैं। इस नाम को ट्रेडमार्क वर्ग 41 के तहत रजिस्टर कराने की कोशिश की जा रही है, जो शिक्षा, प्रशिक्षण, मनोरंजन और सांस्कृतिक सेवाओं से संबंधित है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वापस लिया आवेदन
मीडिया में चर्चा के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने भी इस शब्द को ट्रेडमार्क कराने के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में अपना दावा वापस ले लिया। प्रवक्ता ने पुष्टि करते हुए बताया कि आवेदन श्रेणी 41 में किया गया था, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी भविष्य में मीडिया या क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स में इस नाम का उपयोग करने की योजना बना रही थी।

ये हैं अन्य पांच दावेदार:
रिलायंस के हटने के बाद अब ये पांच नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ट्रेडमार्क के लिए होड़ में बने हुए हैं:

  • मुकेश चेतराम अग्रवाल
  • ग्रुप कैप्टन (सेवानिवृत्त) कमल सिंह ओबेर
  • आलोक कोठारी
  • जयराज टी
  • उत्तम

भावनात्मक और राष्ट्रवादी प्रभाव के चलते बढ़ी मांग
ब्रांडिंग विशेषज्ञों का मानना है कि “ऑपरेशन सिंदूर” एक ऐसा नाम बन चुका है जो राष्ट्रीय भावना और सैन्य पराक्रम से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि इस शब्द को व्यवसायिक ब्रांडिंग के लिए एक सशक्त विकल्प माना जा रहा है। अब देखना यह है कि कानूनी प्रक्रिया के अंत में किसके नाम यह ट्रेडमार्क दर्ज होता है और इसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है—व्यावसायिक या सामाजिक उद्देश्यों के लिए।

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