Ranchi: झारखंड की सियासत में चर्चित कोड़ा कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप झेल रहे पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और उनके कैबिनेट के तीन मंत्रियों के खिलाफ ED और CBI की जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कोड़ा कैबिनेट के छह मंत्रियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी ने साल 2010 में आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें से तीन मंत्रियों—एनोस एक्का, हरि नारायण राय और बंधु तिर्की—को अदालत से सजा भी मिल चुकी है। मगर मधु कोड़ा, भानु प्रताप शाही और कमलेश सिंह के मामले में अब तक कोई बड़ा फैसला नहीं हो पाया है।
10 साल से लंबित है ट्रायल
भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे इन तीन नेताओं के खिलाफ मामले 10 साल से ज्यादा समय से अदालत में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों के बावजूद, जिनमें नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों को तेजी से निपटाने की बात कही गई थी, जांच की रफ्तार बेहद धीमी है।
कोड़ा कांड: कैसे शुरू हुआ मामला
2006–08 में मधु कोड़ा जब झारखंड के निर्दलीय मुख्यमंत्री थे, तब उनके कार्यकाल में अवैध खनन और अन्य घोटालों के आरोप लगे। राजीव शर्मा नामक व्यक्ति की शिकायत पर 2009 में निगरानी थाने में FIR दर्ज हुई।
धीमी जांच पर सवाल उठे, और जनहित याचिकाओं के बाद हाईकोर्ट ने 2010 में सीबीआई और ईडी को जांच का आदेश दिया। इसके बाद आरोप पत्र दायर हुआ।
अब तक का स्टेटस
- एनोस एक्का और हरि नारायण राय को CBI और ED—दोनों मामलों में सजा मिली।
- बंधु तिर्की को सिर्फ CBI मामले में सजा सुनाई गई।
- मधु कोड़ा, भानु प्रताप शाही और कमलेश सिंह के मामले अब भी अदालत में लंबित हैं।
BJP कनेक्शन पर उठे सवाल
दिलचस्प बात यह है कि जिन तीन नेताओं के मामले अब तक लंबित हैं, वे अब या तो भाजपा में शामिल हो चुके हैं या उनसे करीबी संबंध रखते हैं।
- मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा बीजेपी से जुड़ी हुई हैं।
- भानु प्रताप शाही ने 2019 में बीजेपी टिकट पर चुनाव जीता था।
- कमलेश सिंह भी 2024 चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए।
इससे जांच की सुस्ती को लेकर सियासी गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं।

