Ranchi: देशभर में फर्जी GST बिल जारी करने वालों के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद ऐसे मामलों में अब न तो IPC (अब BNS) के तहत थाने में प्राथमिकी दर्ज होगी और न ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत जांच करेगी।
यह आदेश डॉ. मनदीप कुमार बातिश, Additional Director (Intelligence) के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
अब क्या बदला है?
अब फर्जी GST बिल के मामलों में पुलिस या ED कार्रवाई नहीं कर पाएगी, जब तक कि Principal Director General (DGGI) की पूर्व अनुमति न मिल जाए। पहले तक DGGI की मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी और थाना FIR के आधार पर ED स्वतः ECIR दर्ज कर जांच शुरू कर देती थी।
नए आदेश के तहत अब कार्रवाई केवल GST Act की धाराओं के अंतर्गत ही होगी। चूंकि GST अधिनियम की धाराएं PMLA के “Scheduled Offence” में शामिल नहीं हैं, इसलिए ED को अब इन मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं होगा।
फर्जी बिल बनाने वालों को क्यों राहत मिलेगी?
GST अधिनियम की धारा 122(1A) के तहत फर्जी GST बिल बनाने पर केवल आर्थिक दंड (Monetary Penalty) का प्रावधान है।
जेल की सजा तभी संभव है जब कार्रवाई धारा 132 के तहत prosecution तक पहुंचे।
- ₹5 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी पर — 6 महीने से 5 साल तक की सजा
- ₹2-5 करोड़ के बीच — अधिकतम 3 साल की सजा
- ₹1-2 करोड़ तक — अधिकतम 1 साल की सजा
इसके विपरीत, IPC/BNS के तहत दर्ज मामले में ED कार्रवाई कर सकती थी और दोषी पाए जाने पर 5 से 7 साल की जेल और अवैध संपत्ति की कब्ज़ा-जप्ती संभव थी।
आदेश में क्या कहा गया है?
- DGGI द्वारा दर्ज सभी मामलों की सूचना अब CEIB और REIC के माध्यम से अन्य जांच एजेंसियों से साझा की जाएगी।
- पाया गया कि कुछ जोनल इकाइयों ने GST जांच के दौरान पुलिस में IPC धाराओं में FIR दर्ज कराई, जिसके बाद ED ने ECIR दर्ज किए।
- DGGI और CBIC का मानना है कि GST एक विशेष अधिनियम है, इसलिए इसके मामलों को PMLA में शामिल करने से Ease of Doing Business पर नकारात्मक असर पड़ता है।
- जब सामान्य और विशेष अधिनियम में समान अपराध होता है, तो विशेष अधिनियम को प्राथमिकता दी जाती है।
- FIR दर्ज करने या ED को संदर्भ भेजने से पहले अब DGGI के प्रधान महानिदेशक की अनुमति अनिवार्य होगी।
हर साल हजारों करोड़ की टैक्स चोरी
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश में कुल ₹2.23 लाख करोड़ टैक्स चोरी के मामले सामने आए, जिनमें से लगभग ₹58,772 करोड़ फर्जी GST बिल जारी करने से संबंधित थे।
- अप्रैल से अक्टूबर 2024 तक — 17,000 फर्जी प्रतिष्ठानों से ₹35,132 करोड़ की चोरी
- FY 2023-24 में — 30,000 फर्जी प्रतिष्ठान, ₹44,015 करोड़ की टैक्स चोरी
- 2018-19 से 2022-23 तक — ₹1.15 लाख करोड़ ITC घोटाला उजागर
निष्कर्ष
नए आदेश के बाद अब फर्जी GST बिल से जुड़े मामलों में ED की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी।
हालांकि, सरकार को इससे Ease of Doing Business में सुधार की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे टैक्स चोरी करने वालों को अप्रत्यक्ष सुरक्षा मिल सकती है।

