काठमांडू :
नेपाल की सबसे पुरानी और प्रभावशाली लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक संकट सामने आया है। लंबे समय से चल रहे नेतृत्व और आंतरिक मतभेदों के बाद पार्टी औपचारिक रूप से दो गुटों में विभाजित हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब देश आम चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है।
पार्टी में विभाजन की स्थिति तब बनी, जब संगठनात्मक सुधार, नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद गहराते चले गए। वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट और युवा नेताओं के बीच सहमति नहीं बन सकी।
दूसरी ओर, पार्टी के महासचिव गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में एक धड़ा विशेष आम सम्मेलन बुलाने की मांग कर रहा था। इस सम्मेलन के जरिए नई नेतृत्व संरचना तय करने की पहल की गई।
जब दोनों पक्षों के बीच बातचीत विफल रही, तो मतभेद खुलकर सामने आ गए और पार्टी दो अलग-अलग धड़ों में बंट गई। विशेष आम सम्मेलन के बाद गगन थापा को नए अध्यक्ष के रूप में चुने जाने की घोषणा की गई, हालांकि देउबा समर्थक गुट ने इस प्रक्रिया को अवैध बताते हुए अस्वीकार कर दिया है।
आरोप-प्रत्यारोप तेज
विभाजन के बाद दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। कुछ नेताओं ने संगठन को कमजोर करने और बाहरी प्रभावों के आरोप लगाए हैं, हालांकि इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनावी राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विभाजन नेपाल की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है। आम चुनाव से ठीक पहले हुआ यह घटनाक्रम पार्टी की एकजुटता, वोट बैंक और चुनावी रणनीति पर गहरा असर डाल सकता है। साथ ही, यह संकट पार्टी के भीतर पीढ़ियों के अंतर, विचारधारात्मक मतभेद और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान को भी उजागर करता है।

