नई दिल्ली / तेहरान :
2026 की शुरुआत में ईरान में तेजी से बिगड़ते राजनीतिक हालात ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा एजेंसियों की कमजोर पकड़ और प्रशासनिक अस्थिरता के बीच वहां रह रहे हजारों विदेशी नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी बीच, ईरान में मौजूद करीब 9,000 भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। इनमें छात्र, तीर्थयात्री, कामगार और उनके परिवार शामिल हैं।
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी
विदेश मंत्रालय ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा सलाह जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि हालात और बिगड़ने की स्थिति में नागरिक उपलब्ध किसी भी सुरक्षित माध्यम से ईरान छोड़ने की तैयारी रखें।
भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे दूतावास या MEA के आधिकारिक पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर निकासी प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
निकासी मिशन: अब तक की स्थिति
जनवरी 2026 के मध्य (16–17 जनवरी) कुछ भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से ईरान से भारत लाया गया है। ये निकासी भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के समन्वय से संभव हो पाई। दिल्ली पहुंचने पर स्वदेश लौटे नागरिकों का उनके परिजनों ने भावुक स्वागत किया।
विशेष उड़ानों की तैयारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जोखिम वाले इलाकों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए विशेष उड़ानों (एयरलिफ्ट) और वैकल्पिक मार्गों पर काम किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर तेहरान से विशेष विमानों के जरिए बड़े पैमाने पर नागरिकों को वापस लाने की योजना तैयार है।
ईरान में फंसे भारतीय कौन हैं
ईरान में रह रहे भारतीयों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- मेडिकल व धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र
- तीर्थयात्री
- कामगार और प्रोफेशनल्स
- उनके परिवार के सदस्य
इनकी बड़ी संख्या तेहरान, क़ॉम और माशहद जैसे शहरों में रह रही है।
कई भारतीयों ने स्थानीय हालात को चिंताजनक बताया है, जिसमें इंटरनेट सेवाओं का बाधित होना, सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा और सुरक्षा व्यवस्था में कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेश में फंसे प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
✍️ Prachi Anand

