रांची।
राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए मासूम बच्चे अंश और अंशिका की 13 दिनों बाद सकुशल बरामदगी को लेकर जहां झारखंड पुलिस की सराहना हो रही है, वहीं इस पूरे मामले में अब राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबुलाल मरांडी ने झारखंड पुलिस पर पूरे श्रेय का दावा करने का आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अहम सलाह दी है।
13वें दिन बच्चों की सकुशल बरामदगी
धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत मल्लार टोली मौसीबाड़ी से 2 जनवरी को लापता हुए 5 वर्षीय अंश और 4 वर्षीय अंशिका को 13वें दिन रामगढ़ जिले के चितरपुर थाना क्षेत्र के पहाड़ी इलाके से सकुशल बरामद किया गया। दोनों बच्चों को रांची लाकर उनके माता-पिता को सौंप दिया गया।

पुलिस पर “झूठी वाहवाही” का आरोप
बाबुलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बच्चों की बरामदगी में पुलिस ने मेहनत की, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन असली खोजबीन और अंतिम सफलता में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज़ किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अपनी पीठ खुद थपथपा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वालों का नाम तक नहीं लिया गया।

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की भूमिका का दावा
मरांडी के अनुसार, रामगढ़ के चितरपुर से सचिन प्रजापति, डब्लू साहु, सन्नी और उनके साथियों ने साहस और सक्रियता दिखाते हुए बच्चों को ढूंढ निकाला। उन्होंने कहा कि इन युवाओं के प्रयासों की तस्वीरें सामने हैं, जो हकीकत और आधिकारिक बयानों के अंतर को साफ दिखाती हैं।
“पुलिस को पूरा श्रेय नहीं लेना चाहिए”
बाबुलाल मरांडी ने कहा कि पुलिस को चाहिए था कि वह इन युवाओं को सार्वजनिक रूप से प्रोत्साहित करती। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सिर्फ चुनिंदा लोगों को श्रेय और पुरस्कार दिए गए, तो यह गलत परंपरा को बढ़ावा देगा। उन्होंने इसे “दलाल संस्कृति” करार देते हुए इससे बचने की सलाह दी।
CM हेमंत सोरेन को भी दी सलाह
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वे जमीनी हकीकत की जानकारी लें और अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संशोधन कर “असली नायकों” को सम्मान दें। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाएगा।
भाजपा का दावा: अभियान से बना दबाव
इससे पहले एक अन्य बयान में बाबुलाल मरांडी ने कहा कि बच्चों की खोजबीन को लेकर बजरंग दल ने व्यापक अभियान चलाया। रामगढ़ जिले के सभी प्रखंडों में कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई और संभावित इलाकों में लगातार तलाश की। भाजपा का दावा है कि बजरंग दल के अभियान और भाजपा के प्रदर्शन से प्रशासन पर दबाव बना, जिसके बाद पुलिस की तत्परता से यह सफलता संभव हो सकी।

