Babulal Marandi का बयान: झारखंड बंद पर दी प्रतिक्रिया, सीएम हेमंत सोरेन से मामले के समाधान की अपील |

Babulal Marandi का बयान: झारखंड बंद पर दी प्रतिक्रिया, सीएम हेमंत सोरेन से मामले के समाधान की अपील |

Jharkhand Bandh 2025 | Babulal Marandi on Tribal Protest:
झारखंड में सिरमटोली रैंप विवाद को लेकर एक बार फिर आदिवासी संगठनों द्वारा राज्यव्यापी बंद का आयोजन किया गया। राजधानी रांची, लातेहार, और गुमला सहित कई जिलों में बंद का व्यापक असर देखा गया, जहां सरना झंडा और पोस्टर लेकर लोग सड़कों पर उतरे।

इस बंद पर झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में सक्रिय हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की अपील की है।


बाबूलाल मरांडी की सोशल मीडिया पोस्ट

बाबूलाल मरांडी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

“सिरमटोली फ्लाईओवर विवाद के संदर्भ में झारखंड के आदिवासी संगठनों ने आज पुनः बंद का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बीते कई महीनों से आदिवासी संगठन अपनी मांगें उठा रहे हैं। आपसे आग्रह है कि आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाए बिना हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाएं ताकि जारी गतिरोध समाप्त हो सके।”


झारखंड बंद का कारण

इस बंद का मुख्य कारण सिरमटोली रैंप का निर्माण है, जिसे आदिवासी समुदाय धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखता है। बंद का आह्वान सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक किया गया है, जिसमें आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है।


प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे

बंद के दौरान आदिवासी संगठनों ने न सिर्फ सिरमटोली रैंप, बल्कि निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों को भी उठाया:

  • मारंग बुरू, पारसनाथ, लुगुबुरू, दिवरी दिरी जैसे धार्मिक स्थलों का संरक्षण
  • पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन
  • आदिवासी जमीन की लूट पर रोक
  • धार्मिक न्यास बोर्ड का विरोध
  • नियोजन नीति में संशोधन
  • लैंडबैंक नीति का विरोध
  • ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्थापना
  • स्थानीय भाषाओं और संस्कृति का संरक्षण
  • राज्य में शराबबंदी की मांग

निष्कर्ष:

झारखंड बंद के जरिए आदिवासी संगठनों ने राज्य सरकार को अपनी भावनाओं और मांगों से अवगत कराया है। बाबूलाल मरांडी जैसे वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि यह विषय केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।

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