चीन के टॉप सैन्य अधिकारी झांग यूशिया पर परमाणु योजना की जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप लगा है। शी जिनपिंग ने उन्हें पद से हटा दिया। क्या यह जासूसी मामला है या सत्ता संतुलन की बड़ी चाल?
बीजिंग: चीन से सामने आई एक सनसनीखेज खबर ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। चीनी सेना के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वरिष्ठ सदस्य और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी माने जाने वाले जनरल झांग यूशिया को उनके पद से हटा दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारियां अमेरिका को लीक कीं।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, 75 वर्षीय झांग यूशिया पर ‘देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं साझा करने’ का गंभीर आरोप लगाया गया है। हालांकि आधिकारिक बयान में उनके खिलाफ “गंभीर अनुशासनहीनता और कानून के उल्लंघन” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो आमतौर पर चीन में भ्रष्टाचार और सत्ता से जुड़ी गड़बड़ियों के मामलों में कहा जाता है।
झांग यूशिया लंबे समय तक शी जिनपिंग के भरोसेमंद माने जाते रहे हैं। उनके पिता चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और झांग खुद 1968 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में ऊंचे पद पर पहुंचे थे। वे उस सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का हिस्सा थे, जो चीन की सेना से जुड़े हर बड़े फैसले की कमान संभालता है। इस ताकतवर संस्था की अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग करते हैं।
सेना में ‘सफाई अभियान’ का हिस्सा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ कथित जासूसी तक सीमित नहीं है। बीते कुछ वर्षों से शी जिनपिंग सेना और पार्टी तंत्र में अनुशासन और वफादारी को लेकर सख्त अभियान चला रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे सत्ता संतुलन को मजबूत करने की रणनीति भी मानी जा रही है।
झांग यूशिया के साथ एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लियू झेनली का नाम भी जांच में सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, झांग पर रिश्वत लेने, अहम नियुक्तियों में दखल देने और अपने प्रभाव का अलग नेटवर्क खड़ा करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
कभी सात सदस्यों वाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन अब लगातार कार्रवाई के बाद कमजोर होती दिख रही है। ताजा घटनाक्रम के बाद इस शीर्ष सैन्य निकाय में सिर्फ दो पद ही भरे हुए बताए जा रहे हैं। इसे चीन की सैन्य संरचना में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या तख्तापलट की साजिश थी?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि झांग जैसे अनुभवी और प्रभावशाली जनरल को हटाना सिर्फ अनुशासन का मामला नहीं है। यह चीन की आंतरिक राजनीति में वफादारी की नई लकीरें खींचने की कोशिश भी हो सकती है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि कहीं यह सत्ता के भीतर किसी संभावित चुनौती को खत्म करने की रणनीति तो नहीं थी।
डोनाल्ड ट्रंप का नाम क्यों जुड़ रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम को कुछ रिपोर्ट अमेरिकी राजनीति से भी जोड़कर देख रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान चीन के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाने जाते थे। व्यापार युद्ध से लेकर टेक्नोलॉजी प्रतिबंध तक, उन्होंने चीन को खुलकर अमेरिका की सबसे बड़ी चुनौती बताया था।
हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए द्वारा मंदारिन भाषा में एक वीडियो जारी किया गया था, जिसमें चीन से जानकारी बाहर लाने के तरीकों की बात कही गई थी। इसी पृष्ठभूमि में झांग यूशिया पर लगे आरोपों को अमेरिका की खुफिया गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह सब अटकलों के दायरे में ही है।
वैश्विक राजनीति में असर
चीन की परमाणु क्षमताओं और सेना के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े इस विवाद ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के हटाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चीन की आंतरिक राजनीति, सैन्य संरचना और वैश्विक ताकतों के बीच चल रही खींचतान की झलक भी मिलती है।

