रांची :
धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए अंश और अंशिका मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि बच्चों को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से जुड़े मानव तस्करी गिरोह तक पहुंचाने की साजिश पहले से तय थी। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी दंपती ने पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां पुलिस के साथ साझा की हैं।
पुलिस के अनुसार, धुर्वा स्थित मल्लार कोचा मौसीबाड़ी से गायब किए गए बच्चों को आरोपी दंपती तब तक छिपाकर रखने वाले थे, जब तक मामला शांत न हो जाए। इसके बाद उन्हें मानव तस्करी गिरोह के हवाले करने की योजना थी। इस साजिश का खुलासा गिरफ्तार आरोपी नभ खरवार और उसकी पत्नी पूनम कुमारी ने पूछताछ के दौरान किया।
गिरोह के नेटवर्क की जानकारी मिली
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने इस पूरे मामले में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है। साथ ही, उन्होंने अपने गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, संपर्क सूत्रों और कार्यप्रणाली के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
न्यायिक हिरासत और रिमांड
पुलिस ने आरोपी दंपती को 15 जनवरी को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया था। मामले में गहन पूछताछ के लिए पुलिस को पांच दिनों की रिमांड भी मिली है। शुक्रवार को रांची पुलिस की टीम एक बार फिर जेल पहुंची और दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।
सूचना देने वाले को मिला इनाम
अंश–अंशिका मामले में सूचना देने वाले को इनाम न मिलने की चर्चाओं पर रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सूचना का सत्यापन होने के बाद 15 जनवरी को स्वयं सूचना देने वाले से बात कर चार लाख रुपये का इनाम दिया गया है। साथ ही पुलिस की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया। सुरक्षा कारणों से सूचना देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी के इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए SIT की जांच लगातार जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

