हजारीबाग में पकड़ा गया हार्डकोर नक्सली सुनील गंझू, बेलतू नरसंहार समेत 54 मुकदमे दर्ज |

हजारीबाग में पकड़ा गया हार्डकोर नक्सली सुनील गंझू, बेलतू नरसंहार समेत 54 मुकदमे दर्ज |

हजारीबाग:
पुलिस ने एक बड़े नक्सली को धर दबोचा है — सुनील गंझू, जो पूर्व जोनल कमांडर था, को गिरफ्तार किया गया है। उस पर 54 अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज हैं। गिरफ्तारी से नक्सली संगठनों को बड़ा झटका माना जा रहा है।


किस पर है नाम दर्ज:

  • सुनील गंझू पर कुल 54 मामले विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं।
  • उन्हें झारखंड का “टेरर” भी कहा जाता था।
  • विशेष रूप से बेलतू नरसंहार की घटना में वह संलिप्त माना जाता है, जिसमें 13 ग्रामवासी मारे गए थे।
  • सुनील गंझू 1990 से भाकपा (माओवादी) संगठन में सक्रिय था।

गिरफ्तारी कैसे हुई:

पुलिस को सूचना मिली कि बड़कागांव के जोराकाट क्षेत्र में 4-5 संदिग्ध सक्रिय हैं। घेराबंदी के दौरान एक शख्स को झोला लेकर भागते समय पकड़ा गया। पूछताछ में उसने पहचान बतायी कि वह सुनील गंझू है, जो चतरा जिले के पत्थलगड्डा का निवासी है। तलाशी में उसके पास नक्सली लेटरहेड और अन्य पर्चे बरामद हुए।

वह बताता है कि उनका संगठन आमतौर पर 4–5 सदस्यों का दस्ता रखता है। उसने यह भी स्वीकार किया कि हजारीबाग क्षेत्र में कोल कंपनियों, ठेकेदारों और कोयला व्यापारियों से लेवी वसूली का काम भी करता था। इस मामले को एसपी अंजनी अंजन ने सार्वजनिक किया।


बेलतू नरसंहार की दर्दनाक घटना:

2001 में बड़कागांव के बेलतू नरसंहार में माओवादियों ने हथियारों से लैस होकर 13 ग्रामीणों की निर्मम हत्या की थी। बताया जाता है कि ये झारखंड बनने के बाद राज्य में हुई सामूहिक हत्या की सबसे पहली बड़ी घटना थी। हत्या करने के बाद नक्सलियों ने गांव वालों से क्रूरता दिखाई।

सुनील गंझू के गिरफ्तारी के बाद, इस घटना के आरोपी नेतृत्व में मिलने की संभावना पहले से अधिक मजबूत हो गई है।


अजीब रहा उसका रिहा होना और फिर सक्रिय होना:

सुनील गंझू जेल से रिहा होने के बाद फिर से सक्रिय हो गया, और समय-समय पर कई नक्सल गतिविधियों में उसकी भूमिका सामने आती रही।
उत्तरी छोटा नागपुर क्षेत्र में वह रीजनल कमांडर शहदेव महतो और सब-जोनल कमांडर नताशा को मदद पहुंचाने में जुड़ा था।


नया इतिहास:

इस गिरफ्तारी से नक्सली संगठन की कमर टूटने की उम्मीद है। सुनील गंझू का सक्रिय क्षेत्र, माओवादी नेटवर्क, और लेवी वसूली की गतिविधियाँ अब सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं।

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