हाईकोर्ट का नगर निकाय आरक्षण पर सख्त रुख: सरकार व आयोग से जवाब तलब, अगली सुनवाई 17 दिसंबर |

हाईकोर्ट का नगर निकाय आरक्षण पर सख्त रुख: सरकार व आयोग से जवाब तलब, अगली सुनवाई 17 दिसंबर |

Ranchi: झारखंड में नगर निकाय चुनावों के लिए तय किए गए आरक्षण पर उठे सवालों को लेकर हाईकोर्ट में शुक्रवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

यह याचिका शांतनु कुमार चंद्र उर्फ बबलू पासवान की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने रांची और धनबाद नगर निगम में महापौर पद के लिए तय किए गए आरक्षण को चुनौती दी है। उनका कहना है कि रांची नगर निगम में महापौर पद को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी के लिए आरक्षित करना जनसंख्या के हिसाब से उचित है, लेकिन धनबाद में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

याचिकाकर्ता की दलील के अनुसार धनबाद में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी अधिक होने के बावजूद महापौर पद को सामान्य श्रेणी में रखा गया है, जो आरक्षण नियमों के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बिनोद सिंह ने तर्क दिया कि किसी भी नगर निगम क्षेत्र में आरक्षण का निर्धारण वहां की जातिगत जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब धनबाद में SC की आबादी ज्यादा है, तो उस वर्ग को आरक्षण न देना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तृत प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को तय की है।

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