नई दिल्ली: 18 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार तय हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ बताया है, क्योंकि यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है।
सरल शब्दों में कहें तो, इस डील के बाद यूरोप से आने वाला सामान भारत में पहले से कहीं ज्यादा सस्ता और आसानी से उपलब्ध होगा, जबकि भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे और ज्यादा खुल जाएंगे।
आपके लिए क्या सस्ता होगा?
इस समझौते के बाद कई लग्जरी और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है।
- विदेशी कारें: यूरोप से आयात होने वाली कारों पर लगने वाली 110% तक की भारी-भरकम कस्टम ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% तक लाने का लक्ष्य है। इससे लग्जरी कारें आम लोगों की पहुंच में आ सकती हैं।
- खान-पान का सामान: जैतून का तेल (Olive Oil), फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड पहले के मुकाबले सस्ते हो सकते हैं।
- वाइन और बीयर: इन पर लगने वाले टैक्स में 40% से 50% तक की कटौती प्रस्तावित है, जिससे आयातित शराब की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
- दवाइयां और मशीनरी: इलाज में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनें और विदेशी दवाएं अब कम कीमत पर उपलब्ध होंगी।
चीन और अमेरिका पर निर्भरता होगी कम
अब तक भारत कई जरूरी सामानों के लिए चीन और अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर रहा है। इस समझौते के बाद भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे, जिससे तीसरे देशों पर निर्भरता घटेगी। विशेषज्ञ इसे भारत को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
नौकरियों की बाढ़ आएगी
व्यापार बढ़ने का सीधा फायदा रोजगार पर पड़ता है। जानकारों के मुताबिक, इस डील से भारत में लाखों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं। यूरोपीय कंपनियां भारत में अपने प्लांट लगा सकती हैं, जिससे डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों तरह की नौकरियां मिलेंगी। इसके अलावा छोटे और मझोले कारोबारियों (SME) के लिए भी यूरोप का बड़ा बाजार खुलेगा।
पर्यावरण और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा
यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। यूरोपीय संघ भारत को प्रदूषण कम करने और ग्रीन एनर्जी अपनाने के लिए करीब 4,500 करोड़ रुपये (500 मिलियन यूरो) की सहायता देगा। इससे सोलर पावर और क्लीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स को रफ्तार मिलेगी।
कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
- यूरोपीय कारोबारियों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की बचत होने का अनुमान है।
- केमिकल, मशीनरी और स्पेस सेक्टर से जुड़े उत्पादों पर अतिरिक्त ड्यूटी लगभग खत्म हो जाएगी।
- डिजाइन, पेटेंट और कॉपीराइट से जुड़े नियम सख्त होंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार और ज्यादा सुरक्षित होगा।
कुल मिलाकर, भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोजगार के लिहाज से एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।

