झारखंड में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने केंद्रीय मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात कर कई अहम प्रस्ताव रखे।
झारखंड में जल्द ही आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना की जाएगी। इस संबंध में केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात के दौरान यह सहमति बनी।
डॉ. अंसारी ने कहा कि औषधीय पौधों और खनिज संपदाओं से समृद्ध झारखंड में अब तक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की सुविधा नहीं थी। इस अहम जरूरत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष प्रस्ताव रखा था, जिसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा
बैठक में झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, सुदृढ़ और जनहितकारी बनाने को लेकर कई अहम प्रस्तावों पर विचार हुआ। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह भी इस बैठक में मौजूद थे।
अजय कुमार सिंह ने बताया कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे, ताकि योजनाओं को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके।
एमबीबीएस और पीजी सीटों में बढ़ोतरी की योजना
स्वास्थ्य मंत्री ने एसएनएमसीएच धनबाद, एमजीएम जमशेदपुर सहित राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 250 करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही पीजी सीटों में वृद्धि पर भी चर्चा हुई।
डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों की भारी कमी है और बढ़ती आबादी के अनुपात में मेडिकल सीटों में विस्तार बेहद जरूरी है। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि नेशनल मेडिकल कमीशन के निरीक्षण के बाद सीटों में बढ़ोतरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अत्याधुनिक लैब और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
राज्य सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों और रांची के सदर अस्पताल में अत्याधुनिक लैब स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिसे केंद्र ने मंजूरी दी है।
इसके अलावा राज्य के सभी जिलों में वैलनेस सेंटर और पीएचसी के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय सहयोग पर सहमति बनी है।
आयुर्वेद को मिलेगा बढ़ावा
आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना से झारखंड में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को आयुर्वेद की पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

