पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से मौतों के बाद झारखंड सरकार अलर्ट मोड में है। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में निगरानी बढ़ाई गई है और अस्पतालों को तैयार रहने को कहा गया है।
Ranchi:
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से दो लोगों की मौत के बाद झारखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। राज्य सरकार ने किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सतर्क रहने और निपाह वायरस के किसी भी संदिग्ध मामले में तुरंत इलाज शुरू करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि राज्य में वायरस का प्रसार रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है, जो मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में परेशानी और गले में खराश शामिल हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को मानसिक भ्रम, मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफेलाइटिस) और कोमा जैसी समस्या भी हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस अधिकतर फल खाने वाले चमगादड़ों के माध्यम से फैलता है। इसके अलावा संक्रमित जानवरों, विशेषकर सूअरों के संपर्क में आने, उनके मांस के सेवन या संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क से भी संक्रमण का खतरा रहता है। निपाह वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक बताई जाती है, जो करीब 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार ने सभी जिलों में सख्त निगरानी व्यवस्था, त्वरित रिपोर्टिंग सिस्टम और अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि जन-जागरूकता इस समय सबसे अहम है। लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव के उपाय और आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जाएगी।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर निगरानी बनाए हुए हैं, ताकि झारखंड को निपाह वायरस के किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।

