जमशेदपुर।
दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में ट्रेनों की देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाथियों की आवाजाही, सिग्नल केबल की चोरी और घने कोहरे के चलते ट्रेनों को बार-बार रोका जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रेलवे का खुलासा
चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया ने बताया कि सिग्नल सिस्टम और केबल की लगातार चोरी सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। पिछले एक वर्ष में मंडल क्षेत्र में सिग्नल और केबल चोरी की 34 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। हाल के दिनों में सिनी, डीपीएस, टाटानगर और बंडामुंडा इलाकों में ऐसी घटनाएँ अधिक सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि 9 जनवरी की रात सिनी और महाली के बीच सिग्नल केबल और बैटरी चोरी हो जाने के कारण 22 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें करीब 6 से 7 घंटे तक प्रभावित रहीं। इस मामले में अब तक पाँच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
हाथियों की आवाजाही भी बनी बड़ी वजह
रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की आवाजाही के कारण सुरक्षा के मद्देनज़र झारसुगुड़ा से चक्रधरपुर के बीच कई ट्रेनों की गति 30 किमी/घंटा या उससे कम रखी जा रही है। घने कोहरे के कारण दृश्यता घटने से जोखिम और बढ़ जाता है, जिससे परिचालन पर सीधा असर पड़ता है।
हाथियों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम
रेलवे प्रशासन ने बताया कि हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ₹32 करोड़ की लागत से विशेष हाथी कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, ट्रैक पर हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए कई संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की जा रही है।
रेलवे का दावा है कि इन उपायों के लागू होने से भविष्य में ट्रेन सेवाएँ अधिक सुचारू होंगी और यात्रियों को होने वाली असुविधा में कमी आएगी।

