Ranchi: तमिलनाडु की एक कंपनी में बंधक बनाकर रखी गई पूर्वी सिंहभूम की दो नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। दोनों बच्चियों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
यह कार्रवाई झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान लेने के बाद जमशेदपुर पुलिस की तत्परता से संभव हो पाई।

पोटका विधायक ने उठाया था मामला
इस पूरे मामले को सबसे पहले पोटका के झामुमो विधायक संजीव सरदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर उठाया था।
उन्होंने पोस्ट में सीएम हेमंत सोरेन, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव और जमशेदपुर पुलिस को टैग करते हुए दोनों बच्चियों की सकुशल वापसी की मांग की थी।
नौकरी छोड़ने पर बनाया गया था बंधक
पूर्वी सिंहभूम जिले के सुंदरनगर थाना क्षेत्र के बायंगबिल गांव निवासी कृष्णा जोंको ने उपायुक्त को एक आवेदन देकर बताया कि उनकी बेटी और भांजी को तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित क्वांटम निट्स (Quantum Knits – A Unit of KPR Mill Ltd) में बंधक बनाकर रखा गया था।
आवेदन के अनुसार, एक रिश्तेदार ने 22 जुलाई को दोनों को नौकरी दिलाने के बहाने कंपनी में भेजा था।
कुछ दिन तक काम करने के बाद जब दोनों ने नौकरी छोड़ने की इच्छा जताई, तो कंपनी प्रबंधन ने उन्हें जबरन रोक लिया और घर लौटने नहीं दिया।
सीएम के निर्देश के बाद हुई त्वरित कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड पुलिस और प्रवासी सेल (Migrant Cell) को टैग करते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
सीएम ने स्पष्ट कहा कि बच्चियों की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
इसके बाद जमशेदपुर पुलिस ने विशेष टीम गठित की और उसे तमिलनाडु भेजा गया।
टीम ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से दोनों बच्चियों को बरामद कर सुरक्षित रूप से झारखंड वापस लाया।
बच्चियों को परिजनों के हवाले किया गया
वापसी के बाद बच्चियों को सुंदरनगर थाना बुलाकर उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने कहा कि राज्य सरकार अब उनके पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा को लेकर कदम उठा रही है।
निष्कर्ष:
सीएम हेमंत सोरेन के हस्तक्षेप और जमशेदपुर पुलिस की तत्परता से झारखंड की दोनों बेटियां तमिलनाडु से सकुशल घर लौट आईं। यह कार्रवाई राज्य में श्रमिक सुरक्षा और प्रवासी नागरिकों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

