रांची के सुखदेवनगर अतिक्रमण मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। सीओ से पूछा गया कि कब्जा हटाने की जगह निर्माण क्यों ध्वस्त किया गया। अगली सुनवाई 8 मई को।
रांची: राजधानी रांची के सुखदेवनगर इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। महादेव उरांव द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हेहल के सर्किल ऑफिसर (CO) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।
कोर्ट ने पूछा कि जब मामला कब्जा हटाने का था, तो निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई क्यों की गई। इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की और विस्तृत जवाब मांगा।
CO ने कोर्ट में क्या दिया जवाब
हेहल के सर्किल ऑफिसर की ओर से कोर्ट में शोकॉज (Show Cause) दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि संबंधित पक्षों को तीन बार नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद प्रशासन ने निर्माण हटाने की कार्रवाई की।
प्रार्थी से भी कोर्ट के सख्त सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी से भी जवाब तलब किया। कोर्ट ने पूछा कि रिट याचिका दायर करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ हुए समझौते और लेन-देन की जानकारी क्यों छुपाई गई। इस बिंदु पर भी प्रार्थी को जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
पीड़ित पक्ष को राहत बरकरार
कोर्ट ने हस्तक्षेपकर्ताओं की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें मामले में प्रतिवादी बना लिया है। साथ ही, उनके पक्ष में पहले से दी गई अंतरिम राहत को अगली सुनवाई तक जारी रखा गया है, जिससे फिलहाल उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
8 मई को अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है। यह पूरा विवाद रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।

