रांची (झारखंड): राजधानी रांची के प्रतिष्ठित संगठन अंजुमन इस्लामिया, जिसकी स्थापना देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी, एक बार फिर चुनावी सरगर्मी को लेकर सुर्खियों में है। 16 नवंबर को प्रस्तावित चुनाव को लेकर मुस्लिम समाज में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, चुनावी प्रक्रिया की घोषणा के साथ ही विवाद भी शुरू हो गए हैं। निवर्तमान अध्यक्ष मुख्तार अहमद ने मुख्य चुनाव संयोजक की नियुक्ति को ही अवैध करार दिया है। उन्होंने कहा कि बिना अध्यक्ष की अनुमति के चुनाव संयोजक का चयन बायलॉज की धारा 25 का उल्लंघन है।
नए और पुराने चेहरे मैदान में
इस बार चुनावी मैदान में कई नए चेहरे उतरने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं पुराने पदाधिकारी भी सत्ता में वापसी के लिए कोशिश कर रहे हैं। मौजूदा कमेटी में अध्यक्ष मुख्तार अहमद और महासचिव डॉ. मो. तारिक के बीच पूरे कार्यकाल में विवाद चलते रहे, जिससे समाज में असंतोष है।
अध्यक्ष पद के लिए सोशल एक्टिविस्ट और पूर्व पदाधिकारी मैदान में उतर सकते हैं। महासचिव पद के लिए भी सक्रिय युवा नेता और पूर्व उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी में हैं।
मजलिस-ए-आमला में भी रोचक मुकाबला
मजलिस-ए-आमला (कार्यकारिणी समिति) में कई पुराने उम्मीदवार फिर से किस्मत आजमाएंगे। कुछ संगठन बिरादरी के वोटों को साधने की कोशिश में हैं, जबकि कुछ उम्मीदवार सिर्फ आमला के लिए ही छोटी टीमें बनाकर चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
चुनावी कार्यक्रम
- सदस्यता फॉर्म वितरण: 20 सितंबर
- सदस्यता फॉर्म स्क्रूटनी: 21-30 सितंबर
- प्रारूप मतदाता सूची: 1-3 अक्टूबर
- अंतिम मतदाता सूची: 7 अक्टूबर
- नामांकन फॉर्म वितरण: 9-13 अक्टूबर
- नामांकन फॉर्म जमा: 10-14 अक्टूबर
- स्क्रूटनी: 15-17 अक्टूबर
- उम्मीदवार सूची प्रकाशन: 18 अक्टूबर
- नाम वापसी: 19-20 अक्टूबर
- अंतिम सूची: 21 अक्टूबर
- चुनाव चिन्ह वितरण: 25 अक्टूबर
- आमला सदस्यों का चुनाव चिन्ह: 26 अक्टूबर
- चुनाव तिथि: 16 नवंबर
मुख्तार अहमद का बयान
मुख्तार अहमद ने कहा कि चुनाव संयोजक की नियुक्ति अध्यक्ष की अनुमति के बिना की गई है, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष मो. इबरार और सचिव मो. तारिक को लिखे गए पत्र भी दिखाए।
इन विवादों के चलते अंजुमन इस्लामिया का चुनाव इस बार और भी दिलचस्प हो गया है।

