बुंडू में सामाजिक कुरीति निवारण और महिला सशक्तीकरण पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रचार रथ को दिखाई गई हरी झंडी

बुंडू में सामाजिक कुरीति निवारण और महिला सशक्तीकरण पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रचार रथ को दिखाई गई हरी झंडी

बुंडू अनुमंडल कार्यालय में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डायन प्रथा, बाल विवाह और लिंगानुपात असंतुलन पर रोक के लिए योजनाओं की जानकारी दी गई और प्रचार रथ को रवाना किया गया।

बुंडू अनुमंडल कार्यालय सभागार में 15 सितंबर 2025 को सामाजिक कुरीति निवारण और महिला सशक्तीकरण पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी श्री किस्टो बेसरा ने की।

सामाजिक कुरीतियों पर रोक और योजनाओं की जानकारी

कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्री संजय भगत ने डायन प्रथा, बाल विवाह और लिंगानुपात में असंतुलन जैसी सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, विधवा पुनर्विवाह योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन शक्ति सदन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और पोषण स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में भी बताया।

प्रचार रथ और पौधरोपण का शुभारंभ

कार्यक्रम में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए एक प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके साथ ही “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत अनुमंडल कार्यालय परिसर में पौधरोपण किया गया, जिसमें किशोरी बालिकाओं और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बाल विकास परियोजना पर प्रस्तुति

बुंडू अनुमंडल की बाल विकास परियोजना की उपलब्धियों को एक PPT प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी श्री किस्टो बेसरा ने इस प्रस्तुति का अवलोकन किया और परियोजना को और प्रभावी बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए।

संयुक्त प्रयासों पर जोर

इस कार्यक्रम में प्रखंड प्रमुख बुंडू, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और अंचल अधिकारी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना और महिलाओं को सशक्त बनाना था। जिला समाज कल्याण विभाग ने संकल्प लिया कि इस प्रकार की जागरूकता गतिविधियां भविष्य में भी ग्रामीण स्तर तक पहुंचाई जाएंगी।

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