दिल्ली में लाल किले के पास जोरदार धमाका! कई गाड़ियों और दुकानों में आग, इलाके में मचा हड़कंप — पुलिस और बम निरोधक दस्ते की जांच जारी |

दिल्ली में लाल किले के पास जोरदार धमाका! कई गाड़ियों और दुकानों में आग, इलाके में मचा हड़कंप — पुलिस और बम निरोधक दस्ते की जांच जारी |

देश की राजधानी दिल्ली सोमवार शाम एक बार फिर दहशत के साए में आ गई। ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) के पास एक शक्तिशाली धमाके से पूरा इलाका थर्रा उठा।
धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की दुकानों के दरवाजे-खिड़कियां टूट गए, जबकि कई वाहनों में आग लग गई
दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचकर जांच और बचाव कार्य में जुटी हैं।


धमाका लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास

सूत्रों के अनुसार, धमाका लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक एक कार में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद तीन अन्य वाहनों में भी आग फैल गई
धुएं का गुबार पूरे क्षेत्र में फैल गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दमकल विभाग को शाम करीब 6 बजे कॉल मिली, जिसके बाद कई फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
वहीं, धमाके की वजह से मेट्रो स्टेशन के शीशे भी चटक गए और कुछ हिस्सों में हल्का नुकसान हुआ।


मौके पर चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन

फिलहाल दमकल और पुलिस की टीमें राहत-बचाव कार्य में लगी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है
धमाके के कारणों की जांच फॉरेंसिक टीम कर रही है।


सुरक्षा व्यवस्था सख्त

दिल्ली पुलिस ने लाल किले के आसपास का इलाका घेर लिया है और यातायात को डायवर्ट कर दिया गया है।
डीसीपी (नॉर्थ दिल्ली) के मुताबिक, “धमाके के स्रोत की पहचान की जा रही है। फिलहाल सभी सुरक्षा एजेंसियां मौके पर हैं और प्राथमिक जांच जारी है।”
वहीं, खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी संभावित आतंकी कोण (terror link) की जांच की जा सके।


दिल्ली में पहले भी हो चुके हैं बड़े धमाके

राजधानी दिल्ली पहले भी कई बार बम धमाकों और विस्फोटों की चपेट में आ चुकी है।
कुछ प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं —

  • 25 मई 1996: लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट धमाका — 16 की मौत
  • 30 नवंबर 1997: रेड फोर्ट क्षेत्र में डबल ब्लास्ट — 3 मृत, 70 घायल
  • 29 अक्टूबर 2005: पहाड़गंज, गोविंदपुरी और सरोजिनी नगर में तीन धमाके — 60 से अधिक की मौत
  • 13 सितंबर 2008: करोल बाग, सीपी और जीके में पांच धमाके — 20 से अधिक मरे, 90 घायल
  • 25 मई 2011: दिल्ली हाईकोर्ट पार्किंग विस्फोट — हल्का नुकसान, कोई मौत नहीं

इन घटनाओं के बाद भी लाल किले और उसके आसपास का इलाका सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा संवेदनशील जोन में माना जाता है।


निष्कर्ष

लाल किले के पास हुए धमाके ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस, NDRF और बम निरोधक दस्ता घटनास्थल पर जांच कर रहा है।
अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है।

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