Mission Mausam Phase-2: अप्रैल से शुरू होगा नया चरण, मौसम पूर्वानुमान होगा और ज्यादा सटीक

Mission Mausam Phase-2: अप्रैल से शुरू होगा नया चरण, मौसम पूर्वानुमान होगा और ज्यादा सटीक

Mission Mausam Phase-2 अप्रैल से शुरू होगा। IMD देशभर में 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाएगा, जिससे मानसून और मौसम पूर्वानुमान और सटीक होगा।

नई दिल्ली:
देश में मौसम पूर्वानुमान को और अधिक सटीक व आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अप्रैल महीने से ‘मिशन मौसम’ के दूसरे चरण (Phase-2) की शुरुआत करने जा रहा है। इस बात की जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने IMD के 151वें स्थापना दिवस के अवसर पर दी।

शहरों में बढ़ेगी मौसम निगरानी क्षमता

मिशन मौसम फेज़-2 के तहत देशभर में मौसम से जुड़ी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इस योजना का एक अहम हिस्सा प्रमुख शहरों में 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) स्थापित करना है। इन स्टेशनों की मदद से बारिश, तापमान, नमी और हवा की गति जैसी जानकारियां पहले से कहीं अधिक सटीक मिल सकेंगी।

अधिकारियों के अनुसार, पहले मौसम का अनुमान करीब 100 किलोमीटर के दायरे में लगाया जाता था, लेकिन अब मौसम में तेजी से बदलाव होते हैं और असर छोटे क्षेत्रों में दिखता है। इसी कारण अब 1 किलोमीटर के स्तर तक स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की जरूरत महसूस की जा रही है।

बड़े शहरों पर रहेगा खास फोकस

दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और एनसीआर जैसे महानगरों में मौसम निगरानी व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। वर्तमान में देशभर में लगभग 1000 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन कार्यरत हैं, जिनमें से कई नए स्टेशन इसी महीने दिल्ली में लगाए जाने की योजना है।

समुद्र और मानसून पर विशेष ध्यान

मिशन मौसम फेज़-2 में समुद्री क्षेत्रों के मौसम अवलोकन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अभी भारत के समुद्री मौसम आंकड़ों का लगभग 50 प्रतिशत डेटा विदेशी संस्थानों से प्राप्त होता है। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है, क्योंकि मानसून की सटीक भविष्यवाणी में समुद्र से मिलने वाले आंकड़ों की अहम भूमिका होती है।

इसके लिए गहरे समुद्र, तटीय इलाकों और रडार नेटवर्क से अधिक डेटा एकत्र किया जाएगा।

तकनीक और मॉडल होंगे और मजबूत

अधिकारियों का कहना है कि मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ज़मीन, समुद्र और ऊपरी वायुमंडल से अधिक विस्तृत आंकड़ों की जरूरत होती है।
ड्रोन और विमानों की मदद से भी मौसम से जुड़े डेटा जुटाने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही, मौसम पूर्वानुमान मॉडल को और बेहतर किया जाएगा, ताकि भारी बारिश, चक्रवात और अन्य चरम मौसम घटनाओं की समय रहते सटीक चेतावनी दी जा सके।

आम जनता को होगा सीधा लाभ

मिशन मौसम फेज़-2 के लागू होने से बारिश, बाढ़, तूफान और लू जैसी घटनाओं को लेकर पहले और ज्यादा सटीक चेतावनियां मिल सकेंगी। इससे शहरों की आपदा तैयारियों में सुधार होगा और आम लोगों को भी बेहतर सुरक्षा व राहत मिलेगी।

✍️ Prachi Anand

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