Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एक गौरवपूर्ण और देशभक्ति से भरा आयोजन हुआ। अवसर था — भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का।
इस खास मौके पर एयरपोर्ट परिसर में सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एयरपोर्ट कर्मियों, अधिकारियों और CISF जवानों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया।
एयरपोर्ट परिसर गूंज उठा “वंदे मातरम” के स्वर से
कार्यक्रम के दौरान पूरा एयरपोर्ट परिसर देशभक्ति और गर्व की भावना से ओतप्रोत नजर आया।
सभी उपस्थित कर्मचारियों ने इस गीत को भारतीय एकता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे हमेशा राष्ट्रप्रेम और एकता की भावना को सशक्त बनाए रखेंगे।
‘वंदे मातरम’ का इतिहास
जानकारी के अनुसार, 7 नवंबर 1875 को महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चटर्जी ने ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना की थी।
यह गीत पहली बार उसी वर्ष साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।
बाद में इसे 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया।
इतिहास में यह गीत पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था — और तभी से यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बन गया।
गौरव और एकता का प्रतीक आयोजन
रांची एयरपोर्ट पर हुए इस आयोजन ने न केवल कर्मचारियों में देशभक्ति की भावना को मजबूत किया, बल्कि यात्रियों और आगंतुकों को भी राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास की याद दिला दी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने “वंदे मातरम” के जयघोष के साथ भारत माता को नमन किया।

