अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर भारत की पहली प्रतिक्रिया सामने आई। विदेश मंत्रालय ने स्वागत करते हुए कहा- मिडिल ईस्ट में शांति और व्यापार में सुधार की उम्मीद।
भारत ने किया अमेरिका-ईरान सीजफायर का स्वागत
अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्षविराम पर भारत ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसका स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति स्थापित करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।
बातचीत और कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि किसी भी तरह के तनाव का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। भारत लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
संघर्ष से प्रभावित हुई सप्लाई चेन
करीब 39 दिनों तक चले इस तनावपूर्ण माहौल का असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिला।
- सप्लाई चेन प्रभावित हुई
- ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आई
- आम लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ी
भारत ने उम्मीद जताई है कि अब हालात सामान्य होंगे।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से व्यापार को राहत
भारत ने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके खुलने से जहाजों की आवाजाही सुचारू होगी। इससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
निर्यातकों को मिली राहत
भारतीय निर्यात संगठनों ने भी सीजफायर का स्वागत किया है। उनका कहना है कि:
- शिपिंग में देरी कम होगी
- माल ढुलाई का खर्च घटेगा
- बीमा लागत में राहत मिलेगी
हालांकि विशेषज्ञों ने इसे फिलहाल अस्थायी राहत बताया है।
खाड़ी देशों से भारत का बड़ा व्यापार
मिडिल ईस्ट देशों के साथ भारत का व्यापारिक रिश्ता काफी मजबूत है।
- कुल व्यापार: 178 अरब डॉलर (2024-25)
- निर्यात: 56.87 अरब डॉलर
- आयात: 121.67 अरब डॉलर
भारत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों जैसे UAE, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन के साथ व्यापक व्यापार करता है।
दो सप्ताह के लिए हुआ संघर्षविराम
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समयसीमा समाप्त होने से पहले ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम की घोषणा की। बताया जा रहा है कि इस फैसले में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भी भूमिका रही।
ईरान ने भी इस सीजफायर को स्वीकार किया है और आगे बातचीत के लिए सहमति जताई है।

