NEET-PG 2025: तीसरे काउंसलिंग राउंड में कट-ऑफ में बड़ी गिरावट, क्यों मचा देशभर में विवाद?

NEET-PG 2025: तीसरे काउंसलिंग राउंड में कट-ऑफ में बड़ी गिरावट, क्यों मचा देशभर में विवाद?

NEET-PG 2025 के तीसरे काउंसलिंग राउंड में कट-ऑफ में बड़ी कटौती। 18,000 सीटें खाली रहने के बाद सरकार के फैसले पर डॉक्टरों में नाराज़गी और बहस तेज़।

नई दिल्ली।
NEET-PG 2025 को लेकर केंद्र सरकार के निर्देश पर एक बड़ा और विवादित फैसला सामने आया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) ने तीसरे काउंसलिंग राउंड के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ में भारी कटौती की घोषणा की है। इस निर्णय के बाद देशभर में डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।


क्या है नया फैसला?

स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के बाद 9 जनवरी को NBEMS ने कट-ऑफ घटाने का ऐलान किया। यह बदलाव सिर्फ तीसरे काउंसलिंग राउंड के लिए लागू होगा।

  • SC / ST / OBC और दिव्यांग वर्ग
    कट-ऑफ घटाकर 0 पर्सेंटाइल
    यानी लगभग –40 अंक वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के पात्र
  • जनरल कैटेगरी
    कट-ऑफ घटाकर 7वां पर्सेंटाइल
    यानी लगभग 103 अंक

कट-ऑफ घटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

NEET-PG 2025 के पहले और दूसरे काउंसलिंग राउंड के बाद:

  • देशभर में 18,000 से अधिक PG मेडिकल सीटें खाली रह गईं
  • इनमें MD, MS और DNB कोर्स की सीटें शामिल हैं

सरकार का मानना है कि:

  • इतनी बड़ी संख्या में सीटों का खाली रहना
    • डॉक्टरों की कमी वाले देश के लिए नुकसानदायक है
    • मेडिकल संसाधनों की बर्बादी करता है

डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों की नाराज़गी

इस फैसले के बाद कई डॉक्टर संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनकी प्रमुख चिंताएँ हैं:

  • बहुत कम या निगेटिव अंक लाने वाले डॉक्टरों से
    इलाज और सर्जरी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है
  • मेडिकल शिक्षा के मानकों में गिरावट का खतरा
  • मेहनती छात्रों के साथ अन्याय
  • भविष्य में मरीजों की सुरक्षा पर जोखिम

सरकार और समर्थकों की दलील

सरकार और कुछ विशेषज्ञ इस फैसले के समर्थन में तर्क देते हैं कि:

  • देश में पहले से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है
  • खाली PG सीटों का मतलब भविष्य में और कम विशेषज्ञ डॉक्टर
  • PG ट्रेनिंग के दौरान डॉक्टर
    सीनियर विशेषज्ञों की निगरानी में ही काम करते हैं

सरकार का कहना है कि यह फैसला:

  • अस्थायी है
  • सिर्फ तीसरे राउंड के लिए है
  • परीक्षा प्रणाली में कोई स्थायी बदलाव नहीं करता

क्या इससे मेडिकल मानक खत्म हो जाते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा नहीं है। यह निर्णय केवल काउंसलिंग की पात्रता से जुड़ा है।

अंतिम एडमिशन अब भी निर्भर करेगा:

  • सीट की उपलब्धता
  • कॉलेज की शर्तों
  • नियमों और आरक्षण नीति पर

क्यों बना यह मामला इतना संवेदनशील?

मेडिकल पेशा सीधे इंसानी ज़िंदगी से जुड़ा है। ऐसे में:

  • डॉक्टरों की योग्यता पर किसी भी तरह का समझौता
  • समाज में डर और असुरक्षा की भावना पैदा करता है

इसी कारण NEET-PG 2025 का यह फैसला देशभर में गंभीर बहस का विषय बन गया है।

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