जमशेदपुर में फिर मिला द्वितीय विश्व युद्ध का जिंदा बम, स्वर्णरेखा नदी किनारे दहशत, सेना को सूचना |

जमशेदपुर में फिर मिला द्वितीय विश्व युद्ध का जिंदा बम, स्वर्णरेखा नदी किनारे दहशत, सेना को सूचना |

जमशेदपुर के बहरागोड़ा क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी किनारे एक बार फिर द्वितीय विश्व युद्ध का जिंदा बम मिला है। पुलिस ने इलाके को घेरा, सेना की बम निरोधक टीम को बुलाने की तैयारी।

जमशेदपुर: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र में स्थित पानीपोड़ा–नागुड़साईं इलाके में एक बार फिर द्वितीय विश्व युद्ध काल का जिंदा बम मिलने से सनसनी फैल गई है। यह विस्फोटक बुधवार देर रात स्वर्णरेखा नदी के किनारे देखा गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है।

जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने के भीतर यह तीसरी घटना है जब इसी क्षेत्र से पुराने विस्फोटक बरामद हुए हैं। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने से ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि गर्मी के कारण नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है, जिससे नदी के किनारे और अंदर दबे हुए पुराने बम अब दिखाई देने लगे हैं। बुधवार रात कुछ ग्रामीण मछली पकड़ने के लिए नदी किनारे गए थे, तभी उन्हें रेत में एक बड़े आकार की धातु जैसी वस्तु नजर आई। पास जाकर देखने पर वह बम निकला, जिसके बाद लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एहतियातन पूरे इलाके को घेरकर लोगों को दूर रहने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भले ही बम पुराना हो, लेकिन उसमें विस्फोट की क्षमता हो सकती है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही खतरनाक हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले 17 मार्च को भी इसी इलाके में एक बम बरामद किया गया था, जिसे सेना की टीम ने जांच के बाद अमेरिकी निर्मित बताया था। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी पहले विस्फोटक मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि जमीन के अंदर अब भी कई बम दबे हो सकते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछली बार मिले बम को निष्क्रिय करने में सेना को करीब आठ दिन का समय लगा था। इस दौरान लोगों को भय के बीच रहना पड़ा था। अब एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे इलाके की आधुनिक तकनीक से जांच कराई जाए, ताकि जमीन के भीतर छिपे अन्य विस्फोटकों का पता लगाया जा सके। साथ ही, उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण रखने की भी अपील की है।

जानकारों का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा होगा, जिसके चलते यहां सैन्य गतिविधियों के दौरान विस्फोटक छोड़े गए होंगे, जो अब सामने आ रहे हैं।

पुलिस ने इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है और जल्द ही सेना की बम निरोधक टीम को बुलाया जा सकता है। फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।

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