झारखंड में 35 बालू घाटों से फिर शुरू होगा खनन, आज से वैध बालू उठाव की संभावना

झारखंड में 35 बालू घाटों से फिर शुरू होगा खनन, आज से वैध बालू उठाव की संभावना

झारखंड सरकार ने 35 बालू घाटों से वैध खनन और उठाव को मंजूरी दे दी है। नई नियमावली के तहत अब डीसी लीज डीड पर हस्ताक्षर करेंगे। हर दिन करीब 10 लाख CFT बालू बाजार में पहुंचने की संभावना है, जिससे बालू संकट और कालाबाजारी पर रोक लग सकती है।

Jharkhand में लंबे समय से चल रही बालू की कमी के बीच लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार ने 35 बालू घाटों से वैध खनन और उठाव की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शनिवार से कई जिलों में बालू उठाव शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार द्वारा झारखंड बालू खनन नियमावली 2026 में संशोधन किए जाने के बाद अब खनन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि अब तक केवल उपायुक्त स्तर पर हस्ताक्षर नहीं होने के कारण कई घाटों से संचालन शुरू नहीं हो पा रहा था।

डीसी को मिला लीज मंजूरी का अधिकार

नई नियमावली के तहत अब संबंधित जिलों के उपायुक्त यानी डीसी को बालू घाटों की लीज डीड पर हस्ताक्षर करने और अंतिम मंजूरी देने का अधिकार दिया गया है। खान एवं भूतत्व विभाग का मानना है कि इससे बालू घाटों के संचालन में होने वाली देरी कम होगी और प्रक्रिया तेज होगी।

हर दिन लाखों CFT बालू की होगी सप्लाई

राज्य में कुल 444 बालू घाट मौजूद हैं, जिनमें से 290 घाटों की नीलामी पहले ही पूरी हो चुकी है। इनमें से 35 घाट ऐसे हैं जहां सभी आवश्यक अनुमति मिल चुकी है और संचालन शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इन घाटों से प्रतिदिन करीब 10 लाख CFT बालू का उठाव संभव है। इससे हर महीने करोड़ों CFT बालू बाजार तक पहुंच सकता है।

कालाबाजारी और अवैध खनन पर लग सकती है रोक

सरकार को उम्मीद है कि वैध तरीके से बालू आपूर्ति शुरू होने के बाद राज्य में बालू संकट कम होगा। साथ ही अवैध खनन और कालाबाजारी पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। पिछले कई महीनों से बालू की कमी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे और बाजार में कीमतें लगातार बढ़ रही थीं।

जानकारी के मुताबिक, बीते करीब पांच महीनों तक बालू घाटों की नीलामी और उठाव प्रक्रिया पर कानूनी अड़चन बनी हुई थी। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार निर्माण कार्यों को गति देने और बाजार में नियमित बालू आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश में जुट गई है।

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